सोक समाजु राजु केहि लेखें

चौपाई २, दोहा १७८ के अंतर्गत · अयोध्याकाण्ड

चौपाई पाठ

सोक समाजु राजु केहि लेखें। लखन राम सिय बिनु पद देखें॥ बादि बसन बिनु भूषन भारू। बादि बिरति बिनु ब्रह्मबिचारू॥ २ ॥

अर्थ

यह शोक का समुदाय राज्य किस गिनती में है, लक्ष्मण, श्रीराम और सीताजी के पद देखे बिना? जैसे कपड़ों के बिना गहनों का बोझ व्यर्थ है। वैराग्य के बिना ब्रह्मविचार व्यर्थ है।

संदर्भ

यह अयोध्याकाण्ड के “वसिष्ठ-भरत संवाद, चित्रकूट यात्रा की तैयारी” प्रकरण का चौपाई २, दोहा १७८ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में गुरु वसिष्ठ द्वारा भरत को धर्म-उपदेश और चित्रकूट यात्रा की तैयारी का वर्णन है।

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वसिष्ठ-भरत संवाद, चित्रकूट यात्रा की तैयारी