सोइ सिय चलन चहति बन साथा

चौपाई ४, दोहा ५९ के अंतर्गत · अयोध्याकाण्ड

चौपाई पाठ

सोइ सिय चलन चहति बन साथा। आयसु काह होइ रघुनाथा॥ चंद किरन रस रसिक चकोरी। रबि रुख नयन सकइ किमि जोरी॥ ४ ॥

अर्थ

वही सीता अब तुम्हारे साथ वन चलना चाहती है। हे रघुनाथ ! उसे क्या आज्ञा होती है ? चन्द्रमा की किरणों का रस चाहनेवाली चकोरी सूर्य की ओर आँखें किस तरह मिला सकती है।

संदर्भ

यह अयोध्याकाण्ड के “राम-कौसल्या संवाद” प्रकरण का चौपाई ४, दोहा ५९ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में श्रीराम द्वारा माता कौसल्या को वनवास का समाचार और धर्म का उपदेश का वर्णन है।

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राम-कौसल्या संवाद