सो तुम्हार धनु जीवनु प्राना

चौपाई १, दोहा २०८ के अंतर्गत · अयोध्याकाण्ड

चौपाई पाठ

सो तुम्हार धनु जीवनु प्राना। भूरिभाग को तुम्हहि समाना॥ यह तुम्हार आचरजु न ताता। दसरथ सुअन राम प्रिय भ्राता॥ १ ॥

अर्थ

सो वह श्रीरामचन्द्रजी के चरणों का प्रेम ही तुम्हारा धन, जीवन और प्राण है; तुम्हारे समान बड़भागी कौन है? हे तात! तुम्हारे लिए यह आश्चर्य की बात नहीं है। क्योंकि तुम दशरथजी के पुत्र और श्रीरामचन्द्रजी के प्यारे भाई हो।

संदर्भ

यह अयोध्याकाण्ड के “भरतजी का प्रयाग, भरद्वाज से संवाद” प्रकरण का चौपाई १, दोहा २०८ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में भरतजी का प्रयाग तीर्थ दर्शन और महर्षि भरद्वाज से भक्तिपूर्ण संवाद का वर्णन है।

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भरतजी का प्रयाग, भरद्वाज से संवाद