सेवक बचन सत्य सब जाने
सेवक बचन सत्य सब जाने
चौपाई १, दोहा २३५ के अंतर्गत · अयोध्याकाण्ड
चौपाई पाठ
सेवक बचन सत्य सब जाने। आश्रम निकट जाइ निअराने॥ भरत दीख बन सैल समाजू। मुदित छुधित जनु पाइ सुनाजू॥ १ ॥
अर्थ
भरतजी ने सेवक (गुह) के सब वचन सत्य जाने और वे आश्रम के निकट जाकर पहुँच गए। वहाँ के वन और पर्वतों के समूह को देखा तो भरतजी इतने आनन्दित हुए मानो कोई भूखा अच्छा अन्न पा गया हो।
संदर्भ
यह अयोध्याकाण्ड के “भरत का चित्रकूट आगमन, मिलन और श्राद्ध” प्रकरण का चौपाई १, दोहा २३५ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में भरत का मंदाकिनी स्नान, चित्रकूट आगमन, राम-सीता-लक्ष्मण से करुण मिलन और दशरथ का श्राद्ध का वर्णन है।
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भरत का चित्रकूट आगमन, मिलन और श्राद्ध