सानुज राम नृपहि सिर नाई
सानुज राम नृपहि सिर नाई
चौपाई १, दोहा ३१९ के अंतर्गत · अयोध्याकाण्ड
चौपाई पाठ
सानुज राम नृपहि सिर नाई। कीन्हि बहुत बिधि बिनय बड़ाई॥ देव दया बस बड़ दुखु पायउ। सहित समाज काननहिं आयउ॥ १ ॥
अर्थ
छोटे भाई लक्ष्मणजी समेत श्रीरामजी ने राजा जनकजी को सिर नवाकर उनकी बहुत प्रकार से विनती और बड़ाई की [और कहा--] हे देव! दयावश आपने बहुत दुःख पाया। आप समाज सहित वन में आये।
संदर्भ
यह अयोध्याकाण्ड के “भरत की वापसी, पादुका स्थापना, नंदिग्राम निवास” प्रकरण का चौपाई १, दोहा ३१९ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में भरतजी की अयोध्या वापसी, पादुका स्थापना, नंदिग्राम निवास और भरत-चरित्र श्रवण की महिमा का वर्णन है।
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भरत की वापसी, पादुका स्थापना, नंदिग्राम निवास