पुर पगु धारिअ देइ असीसा

चौपाई २, दोहा ३१९ के अंतर्गत · अयोध्याकाण्ड

चौपाई पाठ

पुर पगु धारिअ देइ असीसा। कीन्ह धीर धरि गवनु महीसा॥ मुनि महिदेव साधु सनमाने। बिदा किए हरि हर सम जाने॥ २ ॥

अर्थ

अब आशीर्वाद देकर नगर को पधारिये। यह सुन राजा जनकजी ने धीरज धरकर गमन किया। फिर श्रीरामचन्द्रजी ने मुनि, ब्राह्मण और साधुओं को विष्णु और शिव के समान जानकर सम्मान करके उनको विदा किया।

संदर्भ

यह अयोध्याकाण्ड के “भरत की वापसी, पादुका स्थापना, नंदिग्राम निवास” प्रकरण का चौपाई २, दोहा ३१९ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में भरतजी की अयोध्या वापसी, पादुका स्थापना, नंदिग्राम निवास और भरत-चरित्र श्रवण की महिमा का वर्णन है।

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भरत की वापसी, पादुका स्थापना, नंदिग्राम निवास