सखा समेत मनोहर जोटा
सखा समेत मनोहर जोटा
चौपाई १, दोहा २३९ के अंतर्गत · अयोध्याकाण्ड
चौपाई पाठ
सखा समेत मनोहर जोटा। लखेउ न लखन सघन बन ओटा॥ भरत दीख प्रभु आश्रमु पावन। सकल सुमंगल सदनु सुहावन॥ १ ॥
अर्थ
सखा निषादराज सहित इस मनोहर जोड़े को सघन वन की आड़ के कारण लक्ष्मणजी नहीं देख पाये। भरतजी ने प्रभु श्रीरामचन्द्रजी के समस्त सुमंगलों के धाम और सुन्दर पवित्र आश्रम को देखा।
संदर्भ
यह अयोध्याकाण्ड के “भरत का चित्रकूट आगमन, मिलन और श्राद्ध” प्रकरण का चौपाई १, दोहा २३९ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में भरत का मंदाकिनी स्नान, चित्रकूट आगमन, राम-सीता-लक्ष्मण से करुण मिलन और दशरथ का श्राद्ध का वर्णन है।
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भरत का चित्रकूट आगमन, मिलन और श्राद्ध