सहित समाज साज सब सादें

चौपाई २, दोहा ३११ के अंतर्गत · अयोध्याकाण्ड

चौपाई पाठ

सहित समाज साज सब सादें। चले राम बन अटन पयादें॥ कोमल चरन चलत बिनु पनहीं। भइ मृदु भूमि सकुचि मन मनहीं॥ २ ॥

अर्थ

समाजसहित सब सादे साज से श्रीरामजी के वन में भ्रमण (प्रदक्षिणा) करने के लिये पैदल ही चले। कोमल चरण हैं और बिना जूते के चल रहे हैं, यह देखकर पृथ्वी मन-ही-मन सकुचाकर कोमल हो गयी।

संदर्भ

यह अयोध्याकाण्ड के “भरत का तीर्थ जल स्थापन” प्रकरण का चौपाई २, दोहा ३११ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में भरतजी द्वारा तीर्थ जल स्थापन और चित्रकूट के पवित्र स्थलों का दर्शन का वर्णन है।

पूरा प्रकरण पढ़ें

पूरा प्रकरण पढ़ें
भरत का तीर्थ जल स्थापन