कहत धरम इतिहास सप्रीती

चौपाई १, दोहा ३११ के अंतर्गत · अयोध्याकाण्ड

चौपाई पाठ

कहत धरम इतिहास सप्रीती। भयउ भोरु निसि सो सुख बीती॥ नित्य निबाहि भरत दोउ भाई। राम अत्रि गुर आयसु पाई॥ १ ॥

अर्थ

प्रेमपूर्वक धर्म के इतिहास कहते वह रात सुख से बीत गयी और सबेरा हो गया। भरत-शत्रुघ्न दोनों भाई नित्यक्रिया पूरी करके, श्रीरामजी, अत्रिजी और गुरु वसिष्ठजी की आज्ञा पाकर,।

संदर्भ

यह अयोध्याकाण्ड के “भरत का तीर्थ जल स्थापन” प्रकरण का चौपाई १, दोहा ३११ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में भरतजी द्वारा तीर्थ जल स्थापन और चित्रकूट के पवित्र स्थलों का दर्शन का वर्णन है।

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भरत का तीर्थ जल स्थापन