सहज सनेह राम लखि तासू
सहज सनेह राम लखि तासू
चौपाई ४, दोहा १०४ के अंतर्गत · अयोध्याकाण्ड
चौपाई पाठ
सहज सनेह राम लखि तासू। संग लीन्ह गुह हृदयँ हुलासू॥ पुनि गुहँ ग्याति बोलि सब लीन्हे। करि परितोषु बिदा तब कीन्हे॥ ४ ॥
अर्थ
उसके स्वाभाविक प्रेम को देखकर श्रीरामचन्द्रजी ने उसको साथ ले लिया, इससे गुह के हृदय में बड़ा आनन्द हुआ। फिर गुह ने अपनी जाति के लोगों को बुला लिया और उनका संतोष कराके तब उनको विदा किया।
संदर्भ
यह अयोध्याकाण्ड के “केवट का प्रेम और गंगा पार” प्रकरण का चौपाई ४, दोहा १०४ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में केवट द्वारा प्रभु के चरण पखारने और श्रीराम-सीता-लक्ष्मण को गंगा पार उतारने का वर्णन है।
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केवट का प्रेम और गंगा पार