सादर सब कहँ रामगुर पठए भरि

दोहा २७९ · अयोध्याकाण्ड

दोहा पाठ

सादर सब कहँ रामगुर पठए भरि भरि भार। पूजि पितर सुर अतिथि गुर लगे करन फरहार॥ २७९ ॥

अर्थ

श्रीरामजी के गुरु वसिष्ठजी ने सबके पास बोझे भर-भरकर आदरपूर्वक भेजे। तब वे पितर-देवता, अतिथि और गुरु की पूजा करके फलाहार करने लगे।

संदर्भ

यह अयोध्याकाण्ड के “जनकजी का चित्रकूट आगमन, सबका मिलन” प्रकरण का दोहा २७९ है। इस प्रकरण में राजा जनक का चित्रकूट आगमन और कोल-किरात सहित सभी का प्रेमपूर्ण मिलन का वर्णन है।

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जनकजी का चित्रकूट आगमन, सबका मिलन