सचिव सुसेवक भरत प्रबोधे

चौपाई १, दोहा ३२३ के अंतर्गत · अयोध्याकाण्ड

चौपाई पाठ

सचिव सुसेवक भरत प्रबोधे। निज निज काज पाइ सिख ओधे॥ पुनि सिख दीन्हि बोलि लघु भाई। सौंपी सकल मातु सेवकाई॥ १ ॥

अर्थ

भरतजी ने मन्त्रियों और सेवकों को समझाकर प्रेरित किया। वे सब सीख पाकर अपने-अपने काम में लग गये। फिर छोटे भाई शत्रुघ्नजी को बुलाकर शिक्षा दी और सब माताओं की सेवा उनको सौंपी।

संदर्भ

यह अयोध्याकाण्ड के “भरत की वापसी, पादुका स्थापना, नंदिग्राम निवास” प्रकरण का चौपाई १, दोहा ३२३ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में भरतजी की अयोध्या वापसी, पादुका स्थापना, नंदिग्राम निवास और भरत-चरित्र श्रवण की महिमा का वर्णन है।

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भरत की वापसी, पादुका स्थापना, नंदिग्राम निवास