सभा सकल सुनि रघुबर बानी
सभा सकल सुनि रघुबर बानी
चौपाई १, दोहा ३०७ के अंतर्गत · अयोध्याकाण्ड
चौपाई पाठ
सभा सकल सुनि रघुबर बानी। प्रेम पयोधि अमिअँ जनु सानी॥ सिथिल समाज सनेह समाधी। देखि दसा चुप सारद साधी॥ १ ॥
अर्थ
श्रीरघुनाथजी की वाणी सुनकर, जो मानो प्रेमरूपी समुद्र के [मंथन से निकले हुए] अमृत में सनी हुई थी, सारा समाज शिथिल हो गया; सबको प्रेम समाधि लग गयी। यह दशा देखकर सरस्वती ने चुप साध ली।
संदर्भ
यह अयोध्याकाण्ड के “श्रीराम-भरत संवाद” प्रकरण का चौपाई १, दोहा ३०७ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में श्रीराम द्वारा भरत को पितृ आज्ञा, राजधर्म और समर्पण का उपदेश का वर्णन है।
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श्रीराम-भरत संवाद