सब समेत पुर धारिअ पाऊ
सब समेत पुर धारिअ पाऊ
चौपाई ४, दोहा २४८ के अंतर्गत · अयोध्याकाण्ड
चौपाई पाठ
सब समेत पुर धारिअ पाऊ। आपु इहाँ अमरावति राऊ॥ बहुत कहेउँ सब कियउँ ढिठाई। उचित होइ तस करिअ गोसाँई॥ ४ ॥
अर्थ
अतः सबके साथ आप अयोध्यापुरी को पधारिये (लौट जाइये)। आप यहाँ हैं, और राजा अमरावती (स्वर्ग) में हैं (अयोध्या सूनी है)! मैंने बहुत कह डाला, यह सब बड़ी ढिठाई की है। हे गोसाईं! जैसा उचित हो, वैसा ही कीजिये।
संदर्भ
यह अयोध्याकाण्ड के “भरत का चित्रकूट आगमन, मिलन और श्राद्ध” प्रकरण का चौपाई ४, दोहा २४८ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में भरत का मंदाकिनी स्नान, चित्रकूट आगमन, राम-सीता-लक्ष्मण से करुण मिलन और दशरथ का श्राद्ध का वर्णन है।
पूरा प्रकरण पढ़ें
पूरा प्रकरण पढ़ें
भरत का चित्रकूट आगमन, मिलन और श्राद्ध