नाथ लोग सब निपट दुखारी
नाथ लोग सब निपट दुखारी
चौपाई ३, दोहा २४८ के अंतर्गत · अयोध्याकाण्ड
चौपाई पाठ
नाथ लोग सब निपट दुखारी। कंद मूल फल अंबु अहारी॥ सानुज भरतु सचिव सब माता। देखि मोहि पल जिमि जुग जाता॥ ३ ॥
अर्थ
हे नाथ! सब लोग यहाँ अत्यन्त दुखी हो रहे हैं। कंद, मूल, फल और जल का ही आहार करते हैं। भाई शत्रुघ्न सहित भरत को, मंत्रियों को और सब माताओं को देखकर मुझे एक-एक पल युग के समान बीत रहा है।
संदर्भ
यह अयोध्याकाण्ड के “भरत का चित्रकूट आगमन, मिलन और श्राद्ध” प्रकरण का चौपाई ३, दोहा २४८ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में भरत का मंदाकिनी स्नान, चित्रकूट आगमन, राम-सीता-लक्ष्मण से करुण मिलन और दशरथ का श्राद्ध का वर्णन है।
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भरत का चित्रकूट आगमन, मिलन और श्राद्ध