सब प्रकार भूपति बड़भागी

चौपाई १, दोहा १७४ के अंतर्गत · अयोध्याकाण्ड

चौपाई पाठ

सब प्रकार भूपति बड़भागी। बादि बिषादु करिअ तेहि लागी॥ यह सुनि समुझि सोचु परिहरहू। सिर धरि राज रजायसु करहू॥ १ ॥

अर्थ

राजा सब प्रकार से बड़भागी थे। उनके लिये विषाद करना व्यर्थ है। यह सुन और समझकर सोच त्याग दो और राजा की आज्ञा सिर चढ़ाकर तदनुसार करो।

संदर्भ

यह अयोध्याकाण्ड के “वसिष्ठ-भरत संवाद, चित्रकूट यात्रा की तैयारी” प्रकरण का चौपाई १, दोहा १७४ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में गुरु वसिष्ठ द्वारा भरत को धर्म-उपदेश और चित्रकूट यात्रा की तैयारी का वर्णन है।

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वसिष्ठ-भरत संवाद, चित्रकूट यात्रा की तैयारी