सब कहुँ सुखद राम अभिषेकू
सब कहुँ सुखद राम अभिषेकू
चौपाई १, दोहा २५५ के अंतर्गत · अयोध्याकाण्ड
चौपाई पाठ
सब कहुँ सुखद राम अभिषेकू। मंगल मोद मूल मग एकू॥ केहि बिधि अवध चलहिं रघुराऊ। कहहु समुझि सोइ करिअ उपाऊ॥ १ ॥
अर्थ
श्रीरामजी का राज्याभिषेक सबके लिये सुखदायक है। मंगल और आनन्द का मूल यही एक मार्ग है। [अब] श्रीरघुनाथजी अयोध्या किस प्रकार चलें? विचार करके कहो, वही उपाय किया जाय।
संदर्भ
यह अयोध्याकाण्ड के “श्रीवसिष्ठजी का भाषण” प्रकरण का चौपाई १, दोहा २५५ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में चित्रकूट की सभा में वसिष्ठजी द्वारा धर्म, मर्यादा और भरत-भक्ति पर दिए गए मार्गदर्शक वचनों का वर्णन है।
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श्रीवसिष्ठजी का भाषण