राम सप्रेम कहेउ मुनि पाहीं

चौपाई १, दोहा १०९ के अंतर्गत · अयोध्याकाण्ड

चौपाई पाठ

राम सप्रेम कहेउ मुनि पाहीं। नाथ कहिअ हम केहि मग जाहीं॥ मुनि मन बिहसि राम सन कहहीं। सुगम सकल मग तुम्ह कहुँ अहहीं॥ १ ॥

अर्थ

[चलते समय] बड़े प्रेम से श्रीरामजी ने मुनि से कहा— हे नाथ! बताइए हम किस मार्ग से जाएँ। मुनि मन में हँसकर श्रीरामजी से कहते हैं कि आपके लिए सभी मार्ग सुगम हैं।

संदर्भ

यह अयोध्याकाण्ड के “प्रयाग में भरद्वाज से भेंट” प्रकरण का चौपाई १, दोहा १०९ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में प्रयाग में भरद्वाज मुनि से श्रीराम की भेंट और यमुनातट निवासियों के प्रेम का वर्णन है।

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प्रयाग में भरद्वाज से भेंट