राम सपथ सत कहउँ सुभाऊ
राम सपथ सत कहउँ सुभाऊ
चौपाई १, दोहा ३२ के अंतर्गत · अयोध्याकाण्ड
चौपाई पाठ
राम सपथ सत कहउँ सुभाऊ। राममातु कछु कहेउ न काऊ॥ मैं सबु कीन्ह तोहि बिनु पूँछें। तेहि तें परेउ मनोरथु छूछें॥ १ ॥
अर्थ
राम की सौ सौगंध खाकर मैं स्वभाव से ही कहता हूँ कि राम की माता ने [इस विषय में] मुझसे कभी कुछ नहीं कहा। अवश्य ही मैंने तुमसे बिना पूछे यह सब किया। इसी से मेरा मनोरथ खाली गया।
संदर्भ
यह अयोध्याकाण्ड के “दशरथ-कैकेयी संवाद, सुमंत्र का राम को बुलाना” प्रकरण का चौपाई १, दोहा ३२ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में दशरथ-कैकेयी संवाद, दो वरों की माँग और सुमंत्र द्वारा श्रीराम को महल में बुलाने का वर्णन है।
पूरा प्रकरण पढ़ें
पूरा प्रकरण पढ़ें
दशरथ-कैकेयी संवाद, सुमंत्र का राम को बुलाना