राम सनेह मगन सब जाने

चौपाई ४, दोहा १३५ के अंतर्गत · अयोध्याकाण्ड

चौपाई पाठ

राम सनेह मगन सब जाने। कहि प्रिय बचन सकल सनमाने॥ प्रभुहि जोहारि बहोरि बहोरी। बचन बिनीत कहहिं कर जोरी॥ ४ ॥

अर्थ

श्रीरामजी ने उन सबको प्रेम में मग्र जाना, और प्रिय वचन कहकर सबका सम्मान किया। वे बार-बार प्रभु श्रीरामचन्द्रजी को जोहार करते हुए हाथ जोड़कर विनीत वचन कहते हैं--।

संदर्भ

यह अयोध्याकाण्ड के “चित्रकूट में निवास, कोल-भीलों द्वारा सेवा” प्रकरण का चौपाई ४, दोहा १३५ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में चित्रकूट में श्रीराम के निवास और कोल-भीलों की प्रेमपूर्ण सेवा का वर्णन है।

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चित्रकूट में निवास, कोल-भीलों द्वारा सेवा