अब हम नाथ सनाथ सब भए
अब हम नाथ सनाथ सब भए
दोहा १३५ · अयोध्याकाण्ड
दोहा पाठ
अब हम नाथ सनाथ सब भए देखि प्रभु पाय। भाग हमारें आगमनु राउर कोसलराय॥ १३५ ॥
अर्थ
हे नाथ! प्रभु के चरणों का दर्शन पाकर अब हम सब सनाथ हो गये। हे कोसलराज! हमारे ही भाग्य से आपका यहाँ शुभागमन हुआ है।
संदर्भ
यह अयोध्याकाण्ड के “चित्रकूट में निवास, कोल-भीलों द्वारा सेवा” प्रकरण का दोहा १३५ है। इस प्रकरण में चित्रकूट में श्रीराम के निवास और कोल-भीलों की प्रेमपूर्ण सेवा का वर्णन है।
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चित्रकूट में निवास, कोल-भीलों द्वारा सेवा