राम बचन गुरु नृपहि सुनाए

चौपाई ४, दोहा २९१ के अंतर्गत · अयोध्याकाण्ड

चौपाई पाठ

राम बचन गुरु नृपहि सुनाए। सील सनेह सुभायँ सुहाए॥ महाराज अब कीजिअ सोई। सब कर धरम सहित हित होई॥ ४ ॥

अर्थ

गुरुजी ने श्रीरामचन्द्रजी के शील और स्नेह-युक्त स्वभाव के सुन्दर वचन राजा जनकजी को सुनाये [और कहा--] हे महाराज! अब वही कीजिये जिसमें सब का धर्म सहित हित हो।

संदर्भ

यह अयोध्याकाण्ड के “जनक-वसिष्ठ संवाद, सरस्वती द्वारा इन्द्र को समझाना” प्रकरण का चौपाई ४, दोहा २९१ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में जनक-वसिष्ठ संवाद, इन्द्र की चिंता और सरस्वती द्वारा उनके संशय-निवारण का वर्णन है।

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जनक-वसिष्ठ संवाद, सरस्वती द्वारा इन्द्र को समझाना