आपु आश्रमहि धारिअ पाऊ

चौपाई ३, दोहा २९१ के अंतर्गत · अयोध्याकाण्ड

चौपाई पाठ

आपु आश्रमहि धारिअ पाऊ। भयउ सनेह सिथिल मुनिराऊ॥ करि प्रनामु तब रामु सिधाए। रिषि धरि धीर जनक पहिं आए॥ ३ ॥

अर्थ

अतः आप आश्रम में पधारिये। इतना कह मुनिराज स्नेह से शिथिल हो गये। तब श्रीरामजी प्रणाम करके चले गये और ऋषि धीरज धरकर जनकजी के पास आये।

संदर्भ

यह अयोध्याकाण्ड के “जनक-सुनयना संवाद, भरत की महिमा” प्रकरण का चौपाई ३, दोहा २९१ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में जनक और सुनयना द्वारा भरतजी के त्याग, विनय और भ्रातृभक्ति की महिमा का संवाद का वर्णन है।

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जनक-सुनयना संवाद, भरत की महिमा