राजु देन कहुँ सुभ दिन साधा
राजु देन कहुँ सुभ दिन साधा
चौपाई ४, दोहा ५४ के अंतर्गत · अयोध्याकाण्ड
चौपाई पाठ
राजु देन कहुँ सुभ दिन साधा। कहेउ जान बन केहिं अपराधा॥ तात सुनावहु मोहि निदानू। को दिनकर कुल भयउ कृसानू॥ ४ ॥
अर्थ
राज्य देने के लिये उन्होंने ही शुभ दिन साधा था। फिर अब किस अपराध से वन जाने को कहा ? हे तात! मुझे इसका कारण सुनाओ ! सूर्यवंश [रूपी वन] को जलाने के लिये अग्नि कौन हो गया ?।
संदर्भ
यह अयोध्याकाण्ड के “राम-कौसल्या संवाद” प्रकरण का चौपाई ४, दोहा ५४ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में श्रीराम द्वारा माता कौसल्या को वनवास का समाचार और धर्म का उपदेश का वर्णन है।
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राम-कौसल्या संवाद