रहहु करहु सब कर परितोषू

चौपाई ३, दोहा ७१ के अंतर्गत · अयोध्याकाण्ड

चौपाई पाठ

रहहु करहु सब कर परितोषू। नतरु तात होइहि बड़ दोषू॥ जासु राज प्रिय प्रजा दुखारी। सो नृपु अवसि नरक अधिकारी॥ ३ ॥

अर्थ

अतः तुम यहीं रहो और सब का सन्तोष करते रहो। नहीं तो हे तात! बड़ा दोष होगा। जिसके राज्य में प्यारी प्रजा दुःखी रहती है, वह राजा अवश्य ही नरक का अधिकारी होता है।

संदर्भ

यह अयोध्याकाण्ड के “श्रीराम-लक्ष्मण-संवाद” प्रकरण का चौपाई ३, दोहा ७१ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में लक्ष्मणजी का श्रीराम के साथ वन जाने के लिए प्रेमपूर्ण आग्रह और श्रीराम द्वारा उन्हें कर्तव्य की शिक्षा का वर्णन है।

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श्रीराम-लक्ष्मण-संवाद