मैं बन जाउँ तुम्हहि लेइ साथा
मैं बन जाउँ तुम्हहि लेइ साथा
चौपाई २, दोहा ७१ के अंतर्गत · अयोध्याकाण्ड
चौपाई पाठ
मैं बन जाउँ तुम्हहि लेइ साथा। होइ सबहि बिधि अवध अनाथा॥ गुरु पितु मातु प्रजा परिवारू। सब कहुँ परइ दुसह दुख भारू॥ २ ॥
अर्थ
इस अवस्था में मैं तुमको साथ लेकर वन जाऊँ तो अयोध्या सभी प्रकार से अनाथ हो जायगी। गुरु, पिता, माता, प्रजा और परिवार सभी पर दुःख का दुःसह भार आ पड़ेगा।
संदर्भ
यह अयोध्याकाण्ड के “श्रीराम-लक्ष्मण-संवाद” प्रकरण का चौपाई २, दोहा ७१ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में लक्ष्मणजी का श्रीराम के साथ वन जाने के लिए प्रेमपूर्ण आग्रह और श्रीराम द्वारा उन्हें कर्तव्य की शिक्षा का वर्णन है।
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श्रीराम-लक्ष्मण-संवाद