रघुपति प्रजा प्रेमबस देखी
रघुपति प्रजा प्रेमबस देखी
चौपाई १, दोहा ८५ के अंतर्गत · अयोध्याकाण्ड
चौपाई पाठ
रघुपति प्रजा प्रेमबस देखी। सदय हृदयँ दुखु भयउ बिसेषी॥ करुनामय रघुनाथ गोसाँई। बेगि पाइअहिं पीर पराई॥ १ ॥
अर्थ
प्रजा को प्रेमवश देखकर श्रीरघुनाथजी के दयालु हृदय में बड़ा दुःख हुआ। प्रभु श्रीरघुनाथजी करुणामय हैं। परायी पीड़ा को वे तुरंत पा जाते हैं (अर्थात् दूसरे का दुःख देखकर वे तुरंत स्वयं दुःखित हो जाते हैं)।
संदर्भ
यह अयोध्याकाण्ड के “वनगमन, नगरवासियों को छोड़कर आगे बढ़ना” प्रकरण का चौपाई १, दोहा ८५ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में श्रीराम, सीता और लक्ष्मण के वनगमन और नगरवासियों को सोता छोड़कर आगे बढ़ने का वर्णन है।
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वनगमन, नगरवासियों को छोड़कर आगे बढ़ना