फिरेउ निषादु प्रभुहि पहुँचाई

चौपाई ३, दोहा १४२ के अंतर्गत · अयोध्याकाण्ड

चौपाई पाठ

फिरेउ निषादु प्रभुहि पहुँचाई। सचिव सहित रथ देखेसि आई॥ मंत्री बिकल बिलोकि निषादू। कहि न जाइ जस भयउ बिषादू॥ ३ ॥

अर्थ

प्रभु श्रीरामचन्द्रजी को पहुँचाकर जब निषादराज लौटा, तब आकर उसने मंत्री (सुमन्त्र) सहित रथ को देखा। मन्त्री को व्याकुल देखकर निषाद को जैसा दुःख हुआ, वह कहा नहीं जाता।

संदर्भ

यह अयोध्याकाण्ड के “चित्रकूट में निवास, कोल-भीलों द्वारा सेवा” प्रकरण का चौपाई ३, दोहा १४२ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में चित्रकूट में श्रीराम के निवास और कोल-भीलों की प्रेमपूर्ण सेवा का वर्णन है।

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चित्रकूट में निवास, कोल-भीलों द्वारा सेवा