पय पयोधि तजि अवध बिहाई
पय पयोधि तजि अवध बिहाई
चौपाई ३, दोहा १३९ के अंतर्गत · अयोध्याकाण्ड
चौपाई पाठ
पय पयोधि तजि अवध बिहाई। जहँ सिय लखनु रामु रहे आई॥ कहि न सकहिं सुषमा जसि कानन। जौं सत सहस होहिं सहसानन॥ ३ ॥
अर्थ
क्षीरसागर को त्यागकर और अयोध्या को छोड़कर जहाँ सीता, लक्ष्मण और राम आकर रहे, उस वन जैसी परम शोभा को यदि हजार मुखवाले शेषजी भी हों तो भी नहीं कह सकते।
संदर्भ
यह अयोध्याकाण्ड के “चित्रकूट में निवास, कोल-भीलों द्वारा सेवा” प्रकरण का चौपाई ३, दोहा १३९ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में चित्रकूट में श्रीराम के निवास और कोल-भीलों की प्रेमपूर्ण सेवा का वर्णन है।
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चित्रकूट में निवास, कोल-भीलों द्वारा सेवा