पालव बैठि पेड़ एहिं काटा

चौपाई ३, दोहा ४७ के अंतर्गत · अयोध्याकाण्ड

चौपाई पाठ

पालव बैठि पेड़ एहिं काटा। सुख महुँ सोक ठाटु धरि ठाटा॥ सदा रामु एहि प्रान समाना। कारन कवन कुटिलपनु ठाना॥ ३ ॥

अर्थ

पत्ते पर बैठकर इसने पेड़ को काट डाला। सुख में शोक का ठाट धर ठटा दिया। श्रीरामचन्द्रजी इसे सदा प्राणों के समान प्रिय थे। फिर भी न जाने किस कारण इसने यह कुटिलता ठानी।

संदर्भ

यह अयोध्याकाण्ड के “राम-दशरथ संवाद, कैकेयी को समझाना” प्रकरण का चौपाई ३, दोहा ४७ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में श्रीराम-दशरथ संवाद, अयोध्या का विषाद और कैकेयी को मनाने का असफल प्रयास का वर्णन है।

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राम-दशरथ संवाद, कैकेयी को समझाना