पैठत नगर सचिव सकुचाई

चौपाई २, दोहा १४७ के अंतर्गत · अयोध्याकाण्ड

चौपाई पाठ

पैठत नगर सचिव सकुचाई। जनु मारेसि गुर बाँभन गाई॥ बैठि बिटप तर दिवसु गवाँवा। साँझ समय तब अवसरु पावा॥ २ ॥

अर्थ

नगर में प्रवेश करते मन्त्री [ग्लानि के कारण] ऐसे सकुचाते हैं, मानो गुरु, ब्राह्मण या गौ को मारकर आये हों। सारा दिन एक पेड़ के नीचे बैठकर बिताया। जब सन्ध्या हुई तब मौका मिला।

संदर्भ

यह अयोध्याकाण्ड के “सुमंत्र का शोकमग्न अयोध्या लौटना” प्रकरण का चौपाई २, दोहा १४७ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में सुमंत्र का खाली रथ लेकर शोकमग्न अयोध्या में वापसी और राम-वियोग का सर्वत्र विषाद का वर्णन है।

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सुमंत्र का शोकमग्न अयोध्या लौटना