एहि बिधि करत पंथ पछितावा

चौपाई १, दोहा १४७ के अंतर्गत · अयोध्याकाण्ड

चौपाई पाठ

एहि बिधि करत पंथ पछितावा। तमसा तीर तुरत रथु आवा॥ बिदा किए करि बिनय निषादा। फिरे पायँ परि बिकल बिषादा॥ १ ॥

अर्थ

सुमन्त्र इस प्रकार मार्ग में पछतावा कर रहे थे, इतने में ही रथ तुरंत तमसा नदी के तट पर आ पहुँचा। मन्त्री ने विनय करके चारों निषादों को विदा किया। वे विषाद से व्याकुल होते हुए सुमन्त्र के पैरों पड़कर लौटे।

संदर्भ

यह अयोध्याकाण्ड के “सुमंत्र का शोकमग्न अयोध्या लौटना” प्रकरण का चौपाई १, दोहा १४७ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में सुमंत्र का खाली रथ लेकर शोकमग्न अयोध्या में वापसी और राम-वियोग का सर्वत्र विषाद का वर्णन है।

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सुमंत्र का शोकमग्न अयोध्या लौटना