निरखि बदनु कहि भूप रजाई
निरखि बदनु कहि भूप रजाई
चौपाई ४, दोहा ३९ के अंतर्गत · अयोध्याकाण्ड
चौपाई पाठ
निरखि बदनु कहि भूप रजाई। रघुकुलदीपहि चलेउ लेवाई॥ रामु कुभाँति सचिव सँग जाहीं। देखि लोग जहँ तहँ बिलखाहीं॥ ४ ॥
अर्थ
श्रीरामचन्द्रजी के मुख को देखकर और राजा की आज्ञा सुनाकर वे रघुकुल के दीपक श्रीरामचन्द्रजी को [अपने साथ] लिवा चले। श्रीरामचन्द्रजी मन्त्री के साथ बुरी तरह से (बिना किसी लवाजमे के) जा रहे हैं, यह देखकर लोग जहाँ-तहाँ विषाद कर रहे हैं।
संदर्भ
यह अयोध्याकाण्ड के “दशरथ-कैकेयी संवाद, सुमंत्र का राम को बुलाना” प्रकरण का चौपाई ४, दोहा ३९ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में दशरथ-कैकेयी संवाद, दो वरों की माँग और सुमंत्र द्वारा श्रीराम को महल में बुलाने का वर्णन है।
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दशरथ-कैकेयी संवाद, सुमंत्र का राम को बुलाना