नदी पुनीत पुरान बखानी

चौपाई ३, दोहा १३२ के अंतर्गत · अयोध्याकाण्ड

चौपाई पाठ

नदी पुनीत पुरान बखानी। अत्रिप्रिया निज तप बल आनी॥ सुरसरि धार नाउँ मंदाकिनि। जो सब पातक पोतक डाकिनि॥ ३ ॥

अर्थ

वहाँ पवित्र नदी है, जिसकी पुराणों ने प्रशंसा की है, और जिसे अत्रि की प्रिया ने अपने तपोबल से लायी थीं। वह गंगा जी की धारा है, उसका मन्दाकिनी नाम है। वह सब पापरूपी बालकों को खा डालने के लिये डाकिनी (डाइन) रूप है।

संदर्भ

यह अयोध्याकाण्ड के “श्रीराम-वाल्मीकि-संवाद” प्रकरण का चौपाई ३, दोहा १३२ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में श्रीराम और महर्षि वाल्मीकि का मिलन तथा प्रभु के सच्चे निवास का आध्यात्मिक उपदेश का वर्णन है।

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श्रीराम-वाल्मीकि-संवाद