अत्रि आदि मुनिबर बहु बसहीं
अत्रि आदि मुनिबर बहु बसहीं
चौपाई ४, दोहा १३२ के अंतर्गत · अयोध्याकाण्ड
चौपाई पाठ
अत्रि आदि मुनिबर बहु बसहीं। करहिं जोग जप तप तन कसहीं॥ चलहु सफल श्रम सब कर करहू। राम देहु गौरव गिरिबरहू॥ ४ ॥
अर्थ
अत्रि आदि बहुत-से श्रेष्ठ मुनि वहाँ निवास करते हैं, जो योग, जप और तप करते हुए शरीर को कसते हैं। हे रामजी! चलिये, सबके परिश्रम को सफल कीजिये और पर्वतश्रेष्ठ चित्रकूटको भी गौरव दीजिये।
संदर्भ
यह अयोध्याकाण्ड के “श्रीराम-वाल्मीकि-संवाद” प्रकरण का चौपाई ४, दोहा १३२ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में श्रीराम और महर्षि वाल्मीकि का मिलन तथा प्रभु के सच्चे निवास का आध्यात्मिक उपदेश का वर्णन है।
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श्रीराम-वाल्मीकि-संवाद