मो कहुँ काह कहब रघुनाथा

चौपाई ३, दोहा ७० के अंतर्गत · अयोध्याकाण्ड

चौपाई पाठ

मो कहुँ काह कहब रघुनाथा। रखिहहिं भवन कि लेहहिं साथा॥ राम बिलोकि बंधु कर जोरें। देह गेह सब सन तृनु तोरें॥ ३ ॥

अर्थ

मुझको श्रीरघुनाथजी क्या कहेंगे? घर पर रखेंगे या साथ ले चलेंगे? श्रीरामचन्द्रजी ने भाई लक्ष्मण को हाथ जोड़े और शरीर तथा घर सभी से नाता तोड़े हुए खड़ा देखा।

संदर्भ

यह अयोध्याकाण्ड के “श्रीराम-लक्ष्मण-संवाद” प्रकरण का चौपाई ३, दोहा ७० के अंतर्गत है। इस प्रकरण में लक्ष्मणजी का श्रीराम के साथ वन जाने के लिए प्रेमपूर्ण आग्रह और श्रीराम द्वारा उन्हें कर्तव्य की शिक्षा का वर्णन है।

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श्रीराम-लक्ष्मण-संवाद