बोले बचनु राम नय नागर

चौपाई ४, दोहा ७० के अंतर्गत · अयोध्याकाण्ड

चौपाई पाठ

बोले बचनु राम नय नागर। सील सनेह सरल सुख सागर॥ तात प्रेम बस जनि कदराहू। समुझि हृदयँ परिनाम उछाहू॥ ४ ॥

अर्थ

तब नीति में निपुण और शील, स्नेह, सरलता और सुख के समुद्र श्रीरामचन्द्रजी वचन बोले—हे तात! परिणाम में होने वाले आनन्द को हृदय में समझकर तुम प्रेमवश अधीर मत होओ।

संदर्भ

यह अयोध्याकाण्ड के “श्रीराम-लक्ष्मण-संवाद” प्रकरण का चौपाई ४, दोहा ७० के अंतर्गत है। इस प्रकरण में लक्ष्मणजी का श्रीराम के साथ वन जाने के लिए प्रेमपूर्ण आग्रह और श्रीराम द्वारा उन्हें कर्तव्य की शिक्षा का वर्णन है।

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श्रीराम-लक्ष्मण-संवाद