मिटिहहिं पाप प्रपंच सब अखिल अमंगल
मिटिहहिं पाप प्रपंच सब अखिल अमंगल
दोहा २६३ · अयोध्याकाण्ड
दोहा पाठ
मिटिहहिं पाप प्रपंच सब अखिल अमंगल भार। लोक सुजसु परलोक सुखु सुमिरत नामु तुम्हार॥ २६३ ॥
अर्थ
हे भरत! तुम्हारे नाम-स्मरण से सब पाप, प्रपंच और समस्त अमंगलों का भार मिट जाएगा तथा इस लोक में सुन्दर यश और परलोक में सुख प्राप्त होगा।
संदर्भ
यह अयोध्याकाण्ड के “श्रीराम-भरतादि का संवाद” प्रकरण का दोहा २६३ है। इस प्रकरण में सभा में श्रीराम और भरत के बीच धर्म, राज्य और पितृ आज्ञा विषयक गंभीर संवाद का वर्णन है।
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श्रीराम-भरतादि का संवाद