मंजु बिलोचन मोचति बारी

चौपाई ४, दोहा ५८ के अंतर्गत · अयोध्याकाण्ड

चौपाई पाठ

मंजु बिलोचन मोचति बारी। बोली देखि राम महतारी॥ तात सुनहु सिय अति सुकुमारी। सास ससुर परिजनहि पिआरी॥ ४ ॥

अर्थ

सीताजी सुन्दर नेत्रों से जल बहा रही हैं। उनकी यह दशा देखकर श्रीरामजी की माता कौसल्याजी बोलीं--हे तात! सुनो, सीता अत्यन्त ही सुकुमारी हैं तथा सास, ससुर और कुटुंबी सभी को प्यारी हैं।

संदर्भ

यह अयोध्याकाण्ड के “राम-कौसल्या संवाद” प्रकरण का चौपाई ४, दोहा ५८ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में श्रीराम द्वारा माता कौसल्या को वनवास का समाचार और धर्म का उपदेश का वर्णन है।

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राम-कौसल्या संवाद