मातु तात कहँ देहि देखाई
मातु तात कहँ देहि देखाई
चौपाई २, दोहा १६४ के अंतर्गत · अयोध्याकाण्ड
चौपाई पाठ
मातु तात कहँ देहि देखाई। कहँ सिय रामु लखनु दोउ भाई॥ कैकइ कत जनमी जग माझा। जौं जनमि त भइ काहे न बाँझा॥ २ ॥
अर्थ
माता! पिताजी कहाँ हैं? उन्हें दिखा दे। सीता, राम और दोनों भाई लक्ष्मण कहाँ हैं? [उन्हें दिखा दे।] कैकेयी जगत् में क्यों जनमी? और यदि जनमी ही, तो बाँझ क्यों न हुई?
संदर्भ
यह अयोध्याकाण्ड के “भरत-कौसल्या संवाद और दशरथ की अंत्येष्टि” प्रकरण का चौपाई २, दोहा १६४ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में भरत-कौसल्या मिलन, करुण संवाद और गुरु वसिष्ठ के मार्गदर्शन में दशरथ की अंत्येष्टि का वर्णन है।
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भरत-कौसल्या संवाद और दशरथ की अंत्येष्टि