लखन कहे कछु बचन कठोरा

चौपाई ४, दोहा १५२ के अंतर्गत · अयोध्याकाण्ड

चौपाई पाठ

लखन कहे कछु बचन कठोरा। बरजि राम पुनि मोहि निहोरा॥ बार बार निज सपथ देवाई। कहबि न तात लखन लरिकाई॥ ४ ॥

अर्थ

लक्ष्मणजी ने कुछ कठोर वचन कहे। किन्तु श्रीरामजी ने उन्हें बरजकर फिर मुझसे अनुरोध किया और बार-बार अपनी सौगंध दिलायी [और कहा--] हे तात! लक्ष्मण का लड़कपन वहाँ न कहना।

संदर्भ

यह अयोध्याकाण्ड के “दशरथ-सुमंत्र संवाद और दशरथ का देहावसान” प्रकरण का चौपाई ४, दोहा १५२ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में सुमंत्र-दशरथ संवाद और राम-वियोग में दशरथ का देहावसान का वर्णन है।

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दशरथ-सुमंत्र संवाद और दशरथ का देहावसान