लागि सासु पग कह कर जोरी

चौपाई ३, दोहा ६४ के अंतर्गत · अयोध्याकाण्ड

चौपाई पाठ

लागि सासु पग कह कर जोरी। छमबि देबि बड़ि अबिनय मोरी॥ दीन्हि प्रानपति मोहि सिख सोई। जेहि बिधि मोर परम हित होई॥ ३ ॥

अर्थ

सास के पैर लगकर, हाथ जोड़कर कहने लगीं--हे देवि! मेरी इस बड़ी भारी ढिठाई को क्षमा कीजिये। मुझे प्राणपति ने वही शिक्षा दी है जिससे मेरा परम हित हो।

संदर्भ

यह अयोध्याकाण्ड के “श्रीसीता-राम-संवाद” प्रकरण का चौपाई ३, दोहा ६४ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में सीताजी का वनगमन का दृढ़ निश्चय और श्रीराम से प्रेमपूर्ण संवाद का वर्णन है।

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श्रीसीता-राम-संवाद