लाभ अवधि सुख अवधि न दूजी

चौपाई ४, दोहा १०७ के अंतर्गत · अयोध्याकाण्ड

चौपाई पाठ

लाभ अवधि सुख अवधि न दूजी। तुम्हरें दरस आस सब पूजी॥ अब करि कृपा देहु बर एहू। निज पद सरसिज सहज सनेहू॥ ४ ॥

अर्थ

लाभ की अवधि और सुख की अवधि [प्रभु के दर्शन को छोड़कर] दूसरी कुछ भी नहीं है। आपके दर्शन से मेरी सब आशाएँ पूर्ण हो गयीं। अब कृपा करके यह वरदान दीजिये कि आपके चरणकमलों में मेरा स्वाभाविक प्रेम हो।

संदर्भ

यह अयोध्याकाण्ड के “प्रयाग में भरद्वाज से भेंट” प्रकरण का चौपाई ४, दोहा १०७ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में प्रयाग में भरद्वाज मुनि से श्रीराम की भेंट और यमुनातट निवासियों के प्रेम का वर्णन है।

पूरा प्रकरण पढ़ें

पूरा प्रकरण पढ़ें
प्रयाग में भरद्वाज से भेंट