कुमतिहि कसि कुबेषता फाबी

चौपाई ४, दोहा २५ के अंतर्गत · अयोध्याकाण्ड

चौपाई पाठ

कुमतिहि कसि कुबेषता फाबी। अनअहिवातु सूच जनु भाबी॥ जाइ निकट नृपु कह मृदु बानी। प्रानप्रिया केहि हेतु रिसानी॥ ४ ॥

अर्थ

उस दुर्बुद्धि कैकेयी को यह कुवेषता (बुरा वेष) कैसी फब रही है, मानो भावी विधवापन की सूचना दे रही हो। राजा उसके पास जाकर कोमल वाणी से बोले-हे प्राणप्रिये! किसलिए रिसाई (रूठी) हो ?

संदर्भ

यह अयोध्याकाण्ड के “दशरथ-कैकेयी संवाद, सुमंत्र का राम को बुलाना” प्रकरण का चौपाई ४, दोहा २५ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में दशरथ-कैकेयी संवाद, दो वरों की माँग और सुमंत्र द्वारा श्रीराम को महल में बुलाने का वर्णन है।

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दशरथ-कैकेयी संवाद, सुमंत्र का राम को बुलाना