कोल किरात बेष सब आए
कोल किरात बेष सब आए
चौपाई ४, दोहा १३३ के अंतर्गत · अयोध्याकाण्ड
चौपाई पाठ
कोल किरात बेष सब आए। रचे परन तृन सदन सुहाए॥ बरनि न जाहिं मंजु दुइ साला। एक ललित लघु एक बिसाला॥ ४ ॥
अर्थ
सब देवता कोल-भीलों के वेष में आये और उन्होंने [दिव्य] पत्तों और घासों के सुन्दर घर बना दिये। दो ऐसी सुन्दर कुटियाँ बनायीं जिनका वर्णन नहीं हो सकता। उनमें एक बड़ी सुन्दर छोटी-सी थी और दूसरी बड़ी थी।
संदर्भ
यह अयोध्याकाण्ड के “चित्रकूट में निवास, कोल-भीलों द्वारा सेवा” प्रकरण का चौपाई ४, दोहा १३३ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में चित्रकूट में श्रीराम के निवास और कोल-भीलों की प्रेमपूर्ण सेवा का वर्णन है।
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चित्रकूट में निवास, कोल-भीलों द्वारा सेवा