कीजिअ गुर आयसु अवसि कहहिं सचिव

दोहा १७५ · अयोध्याकाण्ड

दोहा पाठ

कीजिअ गुर आयसु अवसि कहहिं सचिव कर जोरि। रघुपति आएँ उचित जस तस तब करब बहोरि॥ १७५ ॥

अर्थ

मन्त्री हाथ जोड़कर कह रहे हैं—गुरुजी की आज्ञा का अवश्य ही पालन कीजिये। श्रीरघुनाथजी के लौट आने पर जैसा उचित हो, तब फिर वैसा ही कीजियेगा।

संदर्भ

यह अयोध्याकाण्ड के “वसिष्ठ-भरत संवाद, चित्रकूट यात्रा की तैयारी” प्रकरण का दोहा १७५ है। इस प्रकरण में गुरु वसिष्ठ द्वारा भरत को धर्म-उपदेश और चित्रकूट यात्रा की तैयारी का वर्णन है।

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वसिष्ठ-भरत संवाद, चित्रकूट यात्रा की तैयारी