किए अमित उपदेस जहँ तहँ लोगन्ह

सोरठा २७६ · अयोध्याकाण्ड

सोरठा पाठ

किए अमित उपदेस जहँ तहँ लोगन्ह मुनिबरन्ह। धीरजु धरिअ नरेस कहेउ बसिष्ठ बिदेह सन॥ २७६ ॥

अर्थ

जहाँ-तहाँ श्रेष्ठ मुनियों ने लोगों को अपरिमित उपदेश दिये और वसिष्ठजी ने विदेह (जनकजी) से कहा-हे राजन्! आप धैर्य धारण कीजिये।

संदर्भ

यह अयोध्याकाण्ड के “जनकजी का चित्रकूट आगमन, सबका मिलन” प्रकरण का सोरठा २७६ है। इस प्रकरण में राजा जनक का चित्रकूट आगमन और कोल-किरात सहित सभी का प्रेमपूर्ण मिलन का वर्णन है।

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जनकजी का चित्रकूट आगमन, सबका मिलन