कवनें अवसर का भयउ गयउँ नारि

दोहा २९ · अयोध्याकाण्ड

दोहा पाठ

कवनें अवसर का भयउ गयउँ नारि बिस्वास। जोग सिद्धि फल समय जिमि जतिहि अबिद्या नास॥ २९ ॥

अर्थ

किस अवसर पर क्या हो गया। स्त्री का विश्वास करके मैं वैसे ही मारा गया, जैसे योग की सिद्धि फल के समय योगी को अविद्या नष्ट कर देती है।

संदर्भ

यह अयोध्याकाण्ड के “दशरथ-कैकेयी संवाद, सुमंत्र का राम को बुलाना” प्रकरण का दोहा २९ है। इस प्रकरण में दशरथ-कैकेयी संवाद, दो वरों की माँग और सुमंत्र द्वारा श्रीराम को महल में बुलाने का वर्णन है।

पूरा प्रकरण पढ़ें

पूरा प्रकरण पढ़ें
दशरथ-कैकेयी संवाद, सुमंत्र का राम को बुलाना