कौसल्याँ नृपु दीख मलाना

चौपाई २, दोहा १५४ के अंतर्गत · अयोध्याकाण्ड

चौपाई पाठ

कौसल्याँ नृपु दीख मलाना। रबिकुल रबि अँथयउ जियँ जाना॥ उर धरि धीर राम महतारी। बोली बचन समय अनुसारी॥ २ ॥

अर्थ

कौसल्याजी ने राजा को बहुत दुखी देखकर अपने हृदय में जान लिया कि अब सूर्यकुल का सूर्य अस्त हो चला! तब श्रीरामचन्द्रजी की माता कौसल्या हृदय में धीरज धरकर समय के अनुकूल वचन बोलीं--।

संदर्भ

यह अयोध्याकाण्ड के “दशरथ-सुमंत्र संवाद और दशरथ का देहावसान” प्रकरण का चौपाई २, दोहा १५४ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में सुमंत्र-दशरथ संवाद और राम-वियोग में दशरथ का देहावसान का वर्णन है।

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दशरथ-सुमंत्र संवाद और दशरथ का देहावसान