कत सिख देइ हमहि कोउ माई
कत सिख देइ हमहि कोउ माई
चौपाई १, दोहा १४ के अंतर्गत · अयोध्याकाण्ड
चौपाई पाठ
कत सिख देइ हमहि कोउ माई। गालु करब केहि कर बलु पाई॥ रामहि छाड़ि कुसल केहि आजू। जेहि जनेसु देइ जुबराजू॥ १ ॥
अर्थ
कोई हमें क्यों सीख देगा, हे माई! और मैं किसका बल पाकर गाल करूँगी (बढ़-बढ़कर बोलूँगी)। रामचन्द्र को छोड़कर आज और किसकी कुशल है, जिसे राजा युवराज-पद दे रहे हैं।
संदर्भ
यह अयोध्याकाण्ड के “सरस्वती का मंथरा की बुद्धि फेरना” प्रकरण का चौपाई १, दोहा १४ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में सरस्वती द्वारा मंथरा की बुद्धि फेरना और कैकेयी को वरदान माँगने के लिए उकसाने का वर्णन है।
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सरस्वती का मंथरा की बुद्धि फेरना